Panchatantra Ki Kahani Story खरगोश और कछुआ की kahani in Hindi moral story in hindi

Panchatantra Ki Kahani Story खरगोश और कछुआ की kahani in Hindi moral story in hindi

पंचतंत्र की अनोखी कहानियों में से एक 'खरगोश और कछुआ की kahani in Hindi' है जो बहुत ही मनोरंजक है। यह कहानी एक शिकारी सियार और एक बोलने वाले तोते के बीच की है। तोता शिकारी के बनाए गए युक्तियों को समझ लेता है और खुद को बचाता है। यह कहानी बुद्धिमानी और समझदारी को बढ़ावा देती है। आप अपने बच्चों को इसको सुना सकते हैं ताकि वे भी इस अनोखी कहानी Anokhi Kahaniyan का लाभ उठा सकें। gyaankabazaar

शीर्षक: खरगोश और कछुआ: khargosh और कछुआ की kahani 

एक जंगल में एक छोटे से झील के किनारे एक छोटा सा पेड़ था। उस पेड़ पर एक खरगोश और एक कछुआ आपस में मित्रता बना लेते थे। रोज सुबह होते ही वे एक साथ जीभ लगाकर झील के किनारे घूमने निकल जाते थे।

Panchatantra Ki Kahani Story खरगोश और कछुआ की kahani in Hindi


एक दिन, जब वे झील के पानी में नौका पर सवारी कर रहे थे, तभी एक तूफ़ान आया। तूफ़ान के आने से पहले उन्हें भयंकर बिजलियों की चमक और आकाश में गरज की आवाज़ सुनाई दी। वे दोनों भयभीत हो गए और सोचने लगे कि अब तो वे दोनों मर जाएंगे।


छोटे तूफ़ान के कारण झील में उठे तेज लहरें नौके को उलझा रही थीं और नौका विकराल रूप से कंप रही थी। छोटे समय में नौके तूफ़ान की चपेट में आ गई और वे दोनों पश्चाताप करने लगे कि उन्हें नौके में सवार होना ही नहीं चाहिए था।


खरगोश बोला, "हमारी यह लापरवाही हमें बहुत महंगी पड़ेगी। हमें किसी भी तरीके से नौके से बाहर निकलना होगा।"


कछुआ भी भयभीत था लेकिन वह बड़ा होकर भी विवेकी था। उसने खरगोश से कहा, "तुम चिंता न करो, मैं एक योजना बनाऊँगा।"


कछुआ ने अपनी किस्मत में देख ली और अपने कड़ी पलकों को एक बार झपकाया। फिर वह बड़े आराम से बोला, "खरगोश, तुम्हें अपने पंखों की मदद से नौके से बाहर निकलना होगा।"


खरगोश बहुत ही हैरान हुआ और पूछा, "तुम कैसे कह रहे हो कछुआ? मेरे पंख तो तुम्हारे से हज़ार गुना ज्यादा छोटे हैं।"


कछुआ ने प्यार भरी नजरों से खरगोश को देखा और कहा, "हाँ, तुम्हारे पंख तो मेरे से छोटे हैं, लेकिन वे बहुत ही मज़बूत हैं। तुम्हेरे पंख फूलों की तरह होते हैं जिन्हें हवा बहुत आसानी से उड़ा सकती है। जबकि मेरे पंख तो कठोर और स्थिर होते हैं, जैसे कि एक पत्थर की तरह। मैं तुम्हें अपने पंखों पर उठा लूंगा और फिर तुम्हें नौके से बाहर निकलने में मदद कर दूंगा।"


खरगोश ने कछुआ की


 योजना को खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। वे दोनों एक दूसरे के साथ काम करने लगे और कछुआ खरगोश को अपने पंखों पर उठा लिया। तब खरगोश ने अपने पंखों को फैला दिये और धीरे-धीरे उड़ने लगा। वह खिताबी रूप से ऊपर उड़ गया और फिर नौके की सहायता से सुरक्षित रूप से लैंड हो गया।


इसके बाद, खरगोश ने कछुआ को बोला, "तुम्हारी योजना बहुत ही समझदारी से बनी थी, मेरे दोस्त। धन्यवाद।"


कछुआ ने मुस्कराते हुए कहा, "अरे भाई, यह तो कुछ भी नहीं था। हम दोनों दोस्त हैं, और दोस्तों को एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए। यही तो हमारा धर्म है।"


इस घटना के बाद से, खरगोश और कछुआ की मित्रता और मददगारी की कहानी पूरे जंगल में फैल गई। सभी पशुओं ने इस कहानी से एक सबक सीखा कि विश्वासपूर्वक दोस्तों की मदद करना हमारा धर्म है और हमें सभी पशुओं के साथ एक सच्चे मित्र के रूप में रहना चाहिए। अपने दोस्तों की मदद करके हम खुद को खुशहाल बनाते हैं और उन्हें भी साथियों की सहायता करने की प्रेरणा मिलती है।

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